अंधकार से निकल के माता, अमर उजाले में आये (काेरस)
तेरी गाेद में ज्ञान मिला, जाे नश्वर जग न दे पाये

तीन लाेक करते है माता, हृदय से सत्कार तेरा
शुद्ध ज्ञान की दाता माँ, सच्चा जीवन अब हम पाये

कुण्डलिनी देवी का रूप ले, देवलाेक से है आई
महालक्ष्मी, सरस्वती, काली सब तेरी शक्ति माई
माॅं भक्ताे ने तेरी स्तुति गाई, हम सबने अमिट सुख पाये। तेरी गाेद…

धन्य हुए सब जग के प्राणी, इस युग में तेरे आने से
पार हुए सहस्राें प्राणी, तेरे चरण कमल रज पाने से
माँ मिली शान्ति प्रकृति कण काे, जहाँ से निकले तेरा साया। तेरी गाेद…

अब सुध ले माँ अनाथ जीव की, जाे तेरे आंचल में पड़ा हुआ
पैदा किया जिसे दाे मानव ने, अंधकार में बड़ा हुआ
माँ आत्मज्ञान जिसे नहीं मिला, उसे तेरे भक्त ही अपनायें। तेरी गाेद…

सम्पूर्ण समर्पण ले लाे माँ, आगे पथ हमकाे दर्शाओ
सत्य कर्म दाे सत्य वचन दाे, निर्विचार कर हर्षाओ
चंचल चित्त काे निश्चल कर दाे, तेरी सेवा में आये ।